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अध्याय ६: गुआनयिन का परामर्श — महासंत अंततः पकड़ा गया

गुआनयिन बोधिसत्त्व एर्लांग देव को भेजती हैं। वुकोंग और एर्लांग की महाकाव्य रूप-परिवर्तन लड़ाई होती है, अंत में वुकोंग पकड़ा जाता है

सुन वुकोंग गुआनयिन बोधिसत्त्व एर्लांग देव जेड सम्राट पुष्प-फल पर्वत रूपांतरण

दक्षिण समुद्र से गुआनयिन बोधिसत्त्व भोज में पहुँची थीं — लेकिन वहाँ सन्नाटा था।

उनके शिष्य हुइआन के साथ जेड सम्राट के दरबार में गईं।

सब देवताओं ने बताया।

गुआनयिन बोधिसत्त्व ने हुइआन को भेजा — पुष्प-फल पर्वत की स्थिति जानने।

हुइआन गए। तोता-देव से मिले। पता चला — कल की लड़ाई में वानर को नहीं पकड़ा जा सका।

उसी समय वुकोंग ने फिर युद्ध छेड़ा।

हुइआन ने खुद छड़ी उठाई — और वुकोंग से लड़ा। पचास-साठ बार। बराबर। थक गया। भाग गया।

तोता-देव ने संदेश भेजा: — और मदद चाहिए।


जेड सम्राट के दरबार में गुआनयिन ने कहा:

— मेरे पास एक योद्धा है जो यह काम कर सकता है।

— कौन?

एर्लांग देव — आपके भतीजे। ग्वानजियांग में रहते हैं। बहुत शक्तिशाली। लेकिन वो "सुनते हैं पर आदेश नहीं मानते।" उन्हें एक संदेश भेजिए।

जेड सम्राट ने संदेश भेजा।

एर्लांग देव खुश हुए: — चलो भाइयों!

छह भाइयों के साथ — बाज़, कुत्ते, धनुष — उड़ पड़े।

पुष्प-फल पर्वत पर पहुँचे।

एर्लांग ने कहा: — तोता-देव, आप चारों ओर जाल बिछाए रखें। मैं अकेले वुकोंग से लड़ूंगा।

वुकोंग ने एर्लांग को देखा।

चेहरा सुंदर, ऊँचा कद, कंधे चौड़े। तीन पर्वतों वाली टोपी, हल्के पीले कपड़े। धनुष अर्धचंद्र जैसा, तीन-धारी दो-फलक भाला। जिसने कभी पर्वत काटकर माँ को बचाया। जिसने छह राक्षसों को मारा — एर्लांग देव।

वुकोंग ने पूछा: — तुम कौन हो?

— जेड सम्राट के भतीजे — एर्लांग।

— ओह! तुम उसके हो जिसने कभी पहाड़ काटकर माँ को बचाया था। मैं तुमसे लड़ना नहीं चाहता।

— फिर भी खाओ मेरा एक वार।

और शुरू हुई — महालड़ाई।

तीन सौ बार लड़े। बराबर।

एर्लांग ने काया बदली — विशाल रूप। पाँव ज़मीन में, सिर बादलों में।

वुकोंग ने भी वही किया।

फिर — दोनों ने रूप-परिवर्तन खेला।

वुकोंग एक गौरैया बना। एर्लांग एक बाज़। वुकोंग एक बड़ा पक्षी बना। एर्लांग एक समुद्री पक्षी।

वुकोंग पानी में कूदा — मछली बना। एर्लांग मछली-पकड़ने वाला पक्षी।

वुकोंग साँप बना — एर्लांग बगुला।

वुकोंग एक मंदिर बन गया। मुँह दरवाज़ा, दाँत दरवाज़े के पल्ले।

एर्लांग ने देखा — पूँछ पीछे झंडे की तरह खड़ी है।

— अजीब! मंदिरों में झंडा आगे होता है।

— यह मंदिर नहीं — बंदर है!

— खिड़कियाँ तोडूंगा, दरवाज़ा लातों से।

वुकोंग घबराया: — दाँत मेरे हैं! आँखें मेरी हैं!

एक उछाल — गायब।

एर्लांग आगे-पीछे खोजता रहा।

तोता-देव ने ऊपर से देखा: — वानर छिपने का मंत्र करके गया — गुआनजियांग की तरफ।

एर्लांग समझा। खुद एर्लांग का रूप बनाकर वुकोंग अपने मंदिर में बैठा था।

अंदर जाकर एर्लांग ने देखा — वुकोंग अपना ही रूप बनाए बैठा है, भेंट लिस्ट जाँच रहा है।

वुकोंग ने देखा — असली एर्लांग आया।

— पकड़े जाने से पहले भागना होगा।

असली रूप। छड़ी निकाली। दोनों लड़े — मंदिर के बाहर।


इधर गुआनयिन और परम वृद्ध देव स्वर्ग के दक्षिणी द्वार से देख रहे थे।

गुआनयिन ने कहा: — मैं वानर पर अपना शुद्ध-जल का कलश फेंकूं?

परम वृद्ध देव ने कहा: — वो टूट सकता है। मेरे पास एक हथियार है।

उन्होंने एक सोने का छल्ला उठाया।

— यह "वज्र-छल्ला" है। अनेक प्रकार से उपयोगी। इसे वानर के सिर पर गिरा दो।

और — छल्ला गिरा।

वुकोंग एर्लांग से लड़ रहा था। अचानक सिर पर कुछ गिरा।

पाँव डगमगाए।

एर्लांग के कुत्ते ने टाँग पर काटा।

वुकोंग ज़मीन पर गिरा।

सात देवताओं ने एक साथ दबाया। रस्सी बाँधी। कंधे में लोहे की कील।

अब वो बदल नहीं सकता था।


जेड सम्राट खुश हुए। एर्लांग की तारीफ की।

गुआनयिन और परम वृद्ध देव वापस महल।

वुकोंग को वध-स्थल ले जाया गया।

— इसे काट दो!

धोखेबाज़ी का अंत — दंड मिलता है, वीरता का यही परिणाम होता है।

लेकिन — वुकोंग मरेगा? अगले अध्याय में जानो।