अध्याय ५८ — दो मनों ने ब्रह्माण्ड को अस्त-व्यस्त किया, एक देह में सच्ची शान्ति पाना कठिन हुआ
छह-कान वाला बन्दर और सच्चे सुन वुकोंग की लड़ाई स्वर्ग, नरक और अन्त में बुद्ध तक पहुँचती है; तथागत बुद्ध रहस्य उजागर करते हैं।
शा वुजिंग और सच्चे सुन वुकोंग लोका पर्वत से उड़े। शा वुजिंग की बादल-सवारी धीमी थी, सुन वुकोंग की पलटी-बादल तेज़।
—भाई! पहले मत जाओ।
—ठीक है, साथ चलते हैं।
पुष्प-फल पर्वत पर नकली सुन वुकोंग भी वैसा ही था — पीला बाल, सुनहरा पट्टा, अग्नि-नेत्र, सुनहरा दंड।
सच्चे ने क्रोध से आव देखा न ताव — दंड उठाया—
—तुम कौन हो? मेरी गुफा में कैसे घुसे?
दोनों में युद्ध छिड़ा:
दोनों की लाठियाँ, दोनों बन्दर। दोनों सच्चे उद्देश्य का दावा। एक असली है, एक नकली। आकाश में उड़कर लड़ते हैं।
शा वुजिंग दोनों में अन्तर नहीं कर पाया। उसने गुफा में घुसकर बन्दरों को खदेड़ा, पत्थर के आसन तोड़े, बर्तन फोड़े — पर थैले नहीं मिले। जल-परदा गुफा का द्वार झरने के पीछे था — वह नहीं जानता था।
—दोनों को गुरुजी के सामने ले जाते हैं।
शा वुजिंग ने एक-एक को थामा और नीचे उतारा।
तांग सान्ज़ांग ने तंग-मंत्र जपा — दोनों एक साथ चिल्लाये—
—मत पढ़ो!
तांग सान्ज़ांग को भी पहचान नहीं हुई। दोनों फिर लड़ने लगे।
—भाइयो! गुरुजी को सुरक्षित रखो। मैं इसे दक्षिण सागर तक लड़ते हुए ले जाऊँगा — बोधिसत्त्व पहचानेंगी।
बोधिसत्त्व भी नहीं पहचान पाईं। दोनों ने हाथ छोड़े, दोनों ओर खड़े हो गये।
—इस ओर वाला सच्चा है।
—उस ओर वाला नकली है।
बोधिसत्त्व ने मु-झा और सौभाग्य-बालक से कहा— एक-एक को पकड़ो। मैं चुपचाप तंग-मंत्र जपती हूँ। जो दर्द से चिल्लाये, वह सच्चा।
दोनों ने एक-एक को पकड़ा। बोधिसत्त्व ने मन ही मन मंत्र जपा। दोनों एक साथ चिल्लाये — दोनों को दर्द!
—मत पढ़ो!
मन्त्र बन्द हुआ — दोनों फिर लड़ने लगे।
बोधिसत्त्व ने कहा— दोनों ऊपर जाओ, जेड सम्राट से पूछो।
जेड सम्राट ने प्रकाश-दर्पण मँगवाया — दोनों की छाया एक जैसी।
पाताल-लोक में भी यही हुआ। यम-राज ने कहा — जीवन-मृत्यु के रजिस्टर में नकली वानर का कोई नाम नहीं। भूमि-देवता पृथ्वी-श्रवण ने कान लगाया—
—मुझे पता है यह कौन है, लेकिन यहाँ नहीं बता सकता।
—क्यों?
—यदि बताऊँ तो वह उत्पात मचाएगा।
—तो इसे कैसे पकड़ें?
—बुद्ध के पास जाओ।
दोनों पश्चिम की ओर उड़े। रास्ते में लड़ते-लड़ते लिंग-पर्वत पर पहुँचे। आठ वज्रपाणियों ने रोका लेकिन रोक नहीं पाये।
तथागत बुद्ध अपने शिष्यों को बोध-वचन सुना रहे थे—
"न हाँ में हाँ, न ना में ना। न रूप में रूप, न शून्य में शून्य।"
तभी बोले—
—शिष्यो! अभी देखो — दो मन आपस में लड़ते हुए आ रहे हैं।
दोनों अन्दर आकर बुद्ध के सामने घुटने टेके। एक ने सब बताया। दूसरे ने भी वही कहा।
तथागत बुद्ध बोले— तुम्हारे पास बहुत शक्ति है — तुम पूरे जगत में देख सकते हो, लेकिन जगत की हर वस्तु को नहीं पहचान सकते, हर प्रजाति को नहीं जान सकते।
—कौन-सी प्रजातियाँ हैं?
—पाँच अमर: स्वर्गीय, भूमि, दिव्य, मनुष्य, प्रेत। पाँच वर्ग: घोंघा, मछली, बाल, पंख, कीट। यह नकली सुन वुकोंग इनमें से कोई नहीं।
—तो कौन है?
—चार बन्दर हैं जो किसी वर्ग में नहीं: पहला — चमत्कारी पत्थर-बन्दर, जो समय और स्थान जानता है; दूसरा — लाल-नितम्ब घोड़ा-बन्दर, जो दीर्घायु जानता है; तीसरा — लम्बी-भुजाओं वाला बन्दर, जो सूर्य-चन्द्र को छू सकता है; चौथा — छह-कान बन्दर, जो किसी भी आवाज़ को सुन सकता है, किसी भी सत्य को जान सकता है, अतीत-भविष्य सब जानता है।
यह नकली सुन वुकोंग छह-कान बन्दर है।
नकली बन्दर ने सुना — भागा। बुद्ध ने आदेश दिया। वह मधुमक्खी बना और उड़ा। तथागत बुद्ध ने सोने का कटोरा उसके ऊपर उल्टा पटक दिया।
—कोई मत बोलो। वह अभी भी इस कटोरे के नीचे है।
कटोरा हटाया — एक छह-कान बन्दर वहाँ था।
सच्चे सुन वुकोंग ने दंड उठाया और एक प्रहार में उसे समाप्त कर दिया।
तथागत बुद्ध ने कहा— साधु! साधु! जा अपने गुरु की रक्षा करो।
—किन्तु यदि गुरुजी ने नहीं माना?
—गुआनयिन बोधिसत्त्व तुम्हें वापस ले जाएँगी।
गुआनयिन बोधिसत्त्व ने कहा— शुक्रिया बुद्ध।
बोधिसत्त्व सुन वुकोंग को लेकर वापस चलीं।
जहाँ तांग सान्ज़ांग किसान के घर में बैठे थे, झू बाजिए ऊपर से दो थैले लेकर आया—
—भाई! थैले मिल गये — नकली तांग सान्ज़ांग और नकली झू बाजिए को मारा, दोनों बन्दर निकले।
गुआनयिन बोधिसत्त्व ने कहा—
—तांग सान्ज़ांग! तुम्हें जो मारा वह नकली वानर था। तथागत बुद्ध ने पहचाना, सुन वुकोंग ने मारा। अब सुन वुकोंग को साथ रखो, मार्ग में अभी और संकट हैं।
तांग सान्ज़ांग ने सिर झुकाया—
—आज्ञानुसार करूँगा।
बोधिसत्त्व वापस चली गईं।
सभी की गलतफहमी दूर हुई। किसान परिवार को धन्यवाद दिया और पश्चिम की राह पर चल पड़े।
दो मनों का विभाजन — पाँच तत्त्वों में अव्यवस्था। राक्षस हटे, सब मिले, प्रकाश प्रकट हुआ। मन शान्त हुआ — धर्म का मार्ग खुला। आगे क्या होगा? अगले अध्याय में जानें।