Journeypedia
🔍

अध्याय ५: अमृत-आड़ू चुराया, स्वर्ग में हंगामा — दस लाख सेना जाल बिछाए

सुन वुकोंग अमृत-आड़ू उद्यान में आड़ू चुराता है, देव-भोज में घुसता है, परम वृद्ध देव का अमर-दाना खाता है, और स्वर्ग की सेना से लड़ता है

सुन वुकोंग अमृत-आड़ू उद्यान परम वृद्ध देव इच्छानुसार स्वर्णदंड स्वर्ग-तुल्य महासंत जेड सम्राट

स्वर्ग-तुल्य महासंत — यह तो बस एक नाम था। काम नहीं, वेतन नहीं।

वुकोंग रोज़ यहाँ-वहाँ घूमता। देव बनाता दोस्त। तीन "वृद्धों" को "वृद्ध" कहता, चार सम्राटों को "महामहिम।" बाकी सब — बस भाई।

एक दिन जेड सम्राट ने पूछा: — यह वानर खाली बैठा है — कहीं शरारत न करे।

एक मंत्री ने सुझाया: — इसे अमृत-आड़ू उद्यान का प्रबंधन दे दीजिए।

जेड सम्राट ने बुलाया:

— वुकोंग, तुम्हें अमृत-आड़ू उद्यान की देखभाल करनी है।

वुकोंग खुश हुआ।


उद्यान में तीन हज़ार छह सौ पेड़ थे।

पहले वाले हज़ार दो सौ पेड़ों के आड़ू — तीन हज़ार साल में एक बार पकते। खाने से देवत्व मिलता।

बीच वाले हज़ार दो सौ — छह हज़ार साल में पकते। खाने से उड़ने की शक्ति और अमरत्व।

पीछे वाले हज़ार दो सौ — नौ हज़ार साल में पकते। खाने से आकाश और पृथ्वी के बराबर आयु।

वुकोंग ने सब गिना। उद्यान जाँचा।

कुछ दिन बाद — पके आड़ू देखे। लालच हुआ।

— अकेला पहरेदार हूँ — कोई नहीं देख रहा।

उसने सबको बाहर भेजा। खुद पेड़ पर चढ़ा। सबसे बड़े, सबसे पके आड़ू तोड़े — और डाल पर बैठकर खाए।

यही दोहराता रहा। तीन-चार बार।


एक दिन रानी माँ ने भोज का आयोजन किया। सात परियाँ आड़ू लेने उद्यान आईं।

उन्होंने देखा — पिछले हिस्से में पके आड़ू नहीं थे।

खोजते हुए — एक डाल हिली।

एक परी ने डाल खींची। लेकिन असल में वुकोंग उसी डाल पर सो रहा था — एक छोटी-सी आकृति बनकर।

वुकोंग जागा। असली रूप में आया। छड़ी उठाई:

— कौन तुम लोग? मेरे आड़ू कौन ले रहा है?

परियाँ घुटनों पर:

— महासंत जी, हम रानी माँ की दासियाँ हैं। भोज के लिए आड़ू लेने आईं।

— भोज में किसे बुलाया है?

परियों ने सूची बताई: देव, बुद्ध, बोधिसत्त्व, महंत, महासंत...

— क्या मुझे बुलाया?

— हमें नहीं पता।

— पता करो। मैं जाँचने जाता हूँ।

वुकोंग ने स्थिर-शरीर मंत्र पढ़ा। परियाँ जड़ हो गईं।

और वुकोंग उड़ा — सीधे भोज-स्थल की ओर।

रास्ते में एक लाल-पाँव देव मिला।

— कहाँ जा रहे हो? — वुकोंग ने पूछा।

— भोज में।

— अरे, पहले "तोंग-मिंग हॉल" जाना है। जेड सम्राट ने नियम बदला है।

देव चला गया। वुकोंग उसका रूप बना लिया।

भोज-स्थल पहुँचा। खूबसूरत — जेड की मेज़, सोने के प्याले, पर कोई नहीं आया अभी।

एक तरफ था — शराब! हज़ार मटके।

वुकोंग का दिल ललचाया।

उसने कुछ बाल निकाले, चबाए, फूँका। वो बन गए — नींद के कीड़े। सब नौकरों पर उड़ गए।

सब सो गए।

वुकोंग ने भर-भरकर शराब पी। मेज़ पर रखे दिव्य व्यंजन खाए।

नशे में धुत्त। लड़खड़ाते हुए। रास्ता भटक गया।

और — परम वृद्ध देव के महल पहुँच गया।

— अरे! यह तो ताओ के गुरु का घर है!

महल खाली था। गुरु ऊपर पढ़ा रहे थे।

अंदर गया। भट्टी के पास पाँच लौकी देखीं — अमर-दाने से भरी।

वुकोंग ने खाए। जैसे कोई भुने चने खा रहा हो।


नशा उतरा। होश आया।

— यह तो बहुत बड़ी गलती हुई! आड़ू चुराए, भोज में घुसा, शराब पी, और अब अमर-दाना खा लिया।

— भागो! जल्दी!

वो स्वर्ग से निकला। चुपके से पुष्प-फल पर्वत।

वहाँ सेना व्यायाम कर रही थी।

— बच्चो! मैं आया!

सब आए।

— कितने साल रहे?

— कुछ ही महीने।

— नहीं, महाराज — स्वर्ग में एक दिन यहाँ एक साल। आप सौ साल से ज़्यादा थे।

वुकोंग ने बताया:

— देखो — जेड सम्राट ने अच्छा किया। "स्वर्ग-तुल्य महासंत" का पद दिया। फिर अमृत-आड़ू उद्यान। मैंने खूब आड़ू खाए। फिर भोज में घुसा, शराब और दिव्य भोजन खाया। और परम वृद्ध देव के अमर-दाने भी।

सब आनंद में आए।

वुकोंग ने और शराब लेने की बात की। फिर स्वर्ग उड़ा। कुछ बोतलें लाया। सबने पी।


इधर — रानी माँ की सात परियाँ स्थिर-मंत्र से एक दिन बाद मुक्त हुईं।

उन्होंने सब बताया।

रानी माँ जेड सम्राट के पास गईं।

फिर शराब-बनाने वाले देवता आए: — किसी ने सब पी लिया।

फिर परम वृद्ध देव: — अमर-दाना चोरी हुए।

जेड सम्राट क्रोध में भड़क उठे।

— यह वानर! दस लाख सेना भेजो!


आकाश में काली हवाएँ, बैंगनी धुआँ।

तोता-देव, ना ज़ा, अट्ठाईस नक्षत्र-योद्धा, नौ-ग्रह देव — सब उतरे।

अठारह जाल बिछे — पुष्प-फल पर्वत घेरा।

नौ नक्षत्र-योद्धा आगे बढ़े। ललकारा।

वुकोंग शराब पी रहा था।

— आज रात पी लो, कल की चिंता मत करो।

फिर छड़ी निकाली।

नौ योद्धाओं से लड़ा। उन्हें पीछे धकेला।

फिर चारों दिशाओं के राजाओं से लड़ा।

सुबह से शाम। बड़ी लड़ाई।

वुकोंग ने बाल निकाले — हज़ार-हज़ार वुकोंग बन गए। सब लड़ने लगे।

तोता-देव, पाँचों राजा — सब हारे।

लेकिन वुकोंग के वानर सेनापति — राक्षस और जानवर — पकड़े गए।

चार मुख्य हेड-लेफ्टिनेंट भागकर गुफा में छुपे।

वुकोंग अकेला लड़ता रहा।

रात हुई। वुकोंग गुफा आया।

चार हेड-लेफ्टिनेंट ने रोकर बताया:

— हमारे सेनापति सब पकड़े गए।

वुकोंग बोला: — चिंता मत करो। जो पकड़े गए वो जानवर थे। हमारे वानर-परिजन सुरक्षित हैं। कल और बड़ी लड़ाई होगी — खाओ, सोओ, तैयार रहो।

वानर राजा ने स्वर्ग में हंगामा मचाया, जाल और जाल — दस लाख सेना आई।

अगले अध्याय में — गुआनयिन बोधिसत्त्व और एक विशेष योद्धा आएगा जो वुकोंग को पकड़ेगा।