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अध्याय 38: राजकुमार और माँ का सत्य, कुएँ से राजा का शव

रानी ने राजकुमार को सच बताया, वुकोंग और झू बाजिए कुएँ से मृत राजा का शव निकाले

वुजी राज्य राजकुमार रानी कुआँ मृत राजा वुकोंग झू बाजिए

राजकुमार महल के पिछले द्वार से गया। रानी माँ एक मंडप में बैठी थीं — पंखे से हवा ले रही थीं, पर आँखों में आँसू थे।

रानी ने पुत्र को देखकर कहा — बेटे! कितने दिनों बाद दिखे। कितनी खुशी।

राजकुमार घुटनों पर बैठा और बोला — माँ, एक बात पूछनी है।

— पूछो।

— माँ, तीन साल पहले और अब — पिता का प्रेम एक जैसा है?

रानी रुकीं। फिर सभी दासियों को बाहर किया और धीरे से बोलीं —

— बेटे, तीन साल पहले गर्म था। अब जैसे बर्फ।

राजकुमार उठने लगा।

रानी ने उसे रोका — कहाँ?

राजकुमार ने कहा — माँ, पिता मरे हुए हैं। एक राक्षस ने उनकी जगह ले ली। एक तीर्थयात्री संत ने बताया।

रानी की आँखें फटीं।

— क्या सबूत?

राजकुमार ने सोने की जेड छड़ी निकाली।

रानी ने देखा — रोने लगीं।

— यह तो राजा की थी। तीन साल से गायब थी।

— माँ, चार बजे तुम्हें भी सपना आया था?

रानी हैरान — हाँ।

— पिता ने कहा — तांग सान्ज़ांग से मदद माँगो।

— बेटे, जाओ। उन संत को शीघ्र बुलाओ।

राजकुमार घोड़े पर वापस बाओलिन मठ पहुँचा।

— वुकोंग, सब सच है।

वुकोंग ने मुस्कुराते हुए कहा — आज शाम नहीं। कल सुबह जाएँगे।

राजकुमार — मैं यहीं रहूँगा।

वुकोंग ने सोचा — अगर तुम मेरे साथ शहर में गए तो राक्षस सशंकित हो जाएगा।

उसने कहा — पहले तुम खाली हाथ वापस जाओ। सेना तीर रोते हुए लौटी। शिकार न हुआ तो राजा नाराज होगा।

राजकुमार — मैं जाऊँगा कैसे?

वुकोंग ने भूमि देवता और पर्वत देवता को बुलाया — राजकुमार के लिए जानवर लाओ।

देवता खुश हुए। जंगली सुअर, हिरन, खरगोश, मोर — सैकड़ों जीव। उन्हें रास्ते में बिखेर दिया।

राजकुमार की सेना ने बिना बाज और कुत्ते छोड़े जानवर पकड़े।

— कितना शुभ शिकार!

राजकुमार आश्वस्त होकर शहर लौटा।

रात को तांग सान्ज़ांग जागे थे।

वुकोंग ने उनके पास जाकर कहा — गुरु, एक समस्या है। उस राक्षस को पकड़ने के लिए पहले "सबूत" चाहिए। वरना वह बोलेगा — "मैंने कुछ नहीं किया।"

तांग सान्ज़ांग ने कहा — तो?

वुकोंग ने कहा — कुएँ में राजा का शव है। उसे बाहर लाएँगे।

— झू बाजिए को जगाओ।

झू बाजिए सो रहा था। वुकोंग ने कान पकड़कर जगाया।

— क्या?

— एक काम है।

— क्या काम?

वुकोंग ने झूठ बोला — राक्षस के पास एक जादुई हथियार है। पहले चुरा लो।

झू बाजिए ने कहा — चोरी? यह काम तो मैं भी जानता हूँ।

— अगर चोरी से कुछ मिला तो उसे मैं रखूँगा।

वुकोंग ने कहा — सब तुम्हारा।

— चलते हैं।

दोनों ने चुपके से दरवाजा खोला और उड़ चले।

रात के दूसरे पहर में शहर पहुँचे।

दीवार फाँदकर अंदर गए। शाही बगीचे में पहुँचे।

दरवाजे पर सोने की मुहर। झू बाजिए ने नाल से मारा — चूर।

वुकोंग ने अंदर देखा — और उछल पड़ा।

झू बाजिए ने कहा — चोर इस तरह चिल्लाते हैं?

वुकोंग ने बगीचे की दुर्दशा देखी:

"रंगीन बाड़ें टूटी-बिखरी, मंडप और झूले गिरे पड़े। घास उग आई जहाँ फूल थे, गुलाब और कमल मुरझाए। कमल-तालाब सूखा, देवदार और बाँस सूखे काठ। पुराने पत्थर के पहाड़ गिरे, बगीचे में अब बस उजाड़।"

झू बाजिए ने कहा — काम पर लगो।

वुकोंग ने केले के पेड़ को देखा। उसके नीचे एक कुआँ था।

"एक अनोखा केला खड़ा था, बाकी सब पेड़ों से अलग। उसकी पत्तियाँ हरी-घनी, जैसे वह कुछ छुपा रहा हो।"

— झू बाजिए, खोदो।

झू बाजिए ने नाल से गड्ढा खोदा। एक पत्थर का ढक्कन मिला।

झू बाजिए ने पत्थर हटाया — कुएँ से रोशनी आई।

— भाई! यहाँ रत्न है!

नजदीक देखा — वह चाँद की रोशनी थी, पानी में परछाईं।

झू बाजिए बोला — अब क्या?

वुकोंग ने कहा — नीचे जाओ।

— रस्सी कहाँ?

वुकोंग ने लोहदंड खींचकर लंबा किया।

— यह पकड़ो।

झू बाजिए ने पकड़ा। वुकोंग ने धीरे-धीरे नीचे उतारा।

पानी पास आया।

झू बाजिए — रुको, पानी आया।

वुकोंग ने और नीचे किया — धम!

झू बाजिए गिरा। उठा और बड़बड़ाया — वह बंदर! मैंने कहा था पानी पर रोको!

नीचे एक महल दिखा — "जल-क्रिस्टल महल।"

झू बाजिए चौंका — कुएँ में समुद्र?

एक रात-पहरेदार ने दरवाजा खोला। झू बाजिए को देखकर भागा — बड़े राजा, लंबे मुँह का राक्षस गिरा है!

कुएँ का अजगर राजा बाहर आया — यह तो देव-सेना का पुराना जनरल है। उसे अंदर लाओ।

झू बाजिए अंदर गया।

कुएँ के राजा ने कहा — जनरल! सुन वुकोंग ने भेजा?

झू बाजिए — हाँ। उन्होंने कहा — रत्न हैं यहाँ।

— रत्न नहीं है। पर एक चीज है।

झू बाजिए के साथ राजा ने एक शव दिखाया — वुजी राज्य का राजा। तीन साल से कुएँ में। मेरी विशेष मणि ने उसे सड़ने से बचाया।

झू बाजिए ने कहा — मुझे इसे बाहर निकालना होगा?

— अगर वुकोंग के पास इसे जीवित करने का उपाय है तो निकालो।

झू बाजिए — बिना मेहनताना?

राजा — दूँगा।

— कितना?

— पता नहीं।

झू बाजिए — न लूँगा।

राजा ने दरवाजा खोला — जाओ।

झू बाजिए चला।

दो पहरेदारों ने शव उठाया और पानी में डाल दिया।

झू बाजिए पानी में था। अचानक हाथ में शव आया।

झू बाजिए घबराया — किसने पकड़ा!

वह ऊपर की ओर भागा — भाई! दंड दो!

वुकोंग ने कहा — रत्न मिला?

— पानी में एक मुर्दा था।

वुकोंग ने कहा — वही रत्न है।

— मुझे उसे ऊपर निकालना होगा?

— हाँ।

झू बाजिए ने सोचा — ऊपर जाने के लिए रस्सी नहीं। कुएँ की दीवारें काई से ढकी।

— भाई, बचाओ।

— शव उठाओ, तभी।

झू बाजिए ने शव उठाया। दंड को दाँत से पकड़ा।

वुकोंग ने ऊपर खींचा।

शव को जमीन पर रखा।

राजा की त्वचा ताजी थी — जैसे अभी मरा हो।

वुकोंग ने कहा — तीन साल बाद भी सड़ा नहीं।

झू बाजिए ने कहा — उसने मणि डाल दी थी।

वुकोंग ने कहा — बहुत अच्छा। हम सफल होंगे।

— शव मठ ले चलो।

झू बाजिए बड़बड़ाया — मैं मुर्दा उठाऊँ?

— हाँ।

— और रास्ते में पानी टपकेगा।

— चुपचाप उठाओ।

वुकोंग ने एक मंत्र पढ़ा। हवा चली। दोनों उड़े।

मठ पहुँचे।

तांग सान्ज़ांग ने देखा — आँखें भर गईं।

झू बाजिए ने कहा — रोओ मत। वुकोंग जीवित करेगा।

तांग सान्ज़ांग ने वुकोंग से पूछा — क्या कर सकते हो?

वुकोंग ने कहा — तीन साल बाद जीवित करना आसान नहीं।

— तो हमने क्यों लाया?

झू बाजिए ने कहा — गुरु, वह झूठ बोल रहा है।

तांग सान्ज़ांग ने "कसने वाला मंत्र" पढ़ा।

वुकोंग का सिर दर्द से फटने लगा।

— माफ करो! माफ करो! मैं करता हूँ।