अध्याय 31: झू बाजिए की चालाकी और सुन वुकोंग की वापसी
झू बाजिए अपनी चतुराई से सुन वुकोंग को वापस बुलाता है और पीत-वस्त्र राक्षस का नाश होता है
भ्रातृप्रेम से बंधा वानर लौट आया, धर्म और बुद्धि ने राक्षस को धराया। स्वर्ण-काष्ठ मिले तो फल निश्चित होता, मन और माया का संगम ही पूर्ण होता।
वह भोला झू बाजिए बंदरों के झुंड में पकड़ा गया। वे उसे घसीट-घसीट कर खींच रहे थे। उसका चोगा फट गया। वह बड़बड़ाता रहा — यह तो मेरी खाल उतरेगी।
जल्द ही वे पहाड़ी की उस गुफा में पहुँचे जहाँ महासंत बैठे थे।
सुन वुकोंग पत्थर की चट्टान पर विराजमान था। वह गरजा — तू निकम्मा, जाते समय मुझे गालियाँ दीं!
झू बाजिए घुटनों के बल गिरा — भाई, मैंने गाली नहीं दी। अगर दी होती तो जीभ कट जाती। मैंने तो सिर्फ यही कहा था कि तुम नहीं आओगे, इसलिए मैं खुद ही गुरु को बताने जाऊँगा।
वुकोंग बोला — तू मुझसे छुपाएगा? मेरा बायाँ कान ऊपर खिंचे तो तैंतीस स्वर्गों की बातें सुनाई देती हैं। दाहिना नीचे खिंचे तो दसों यमराजों के हिसाब सुनाई देते हैं। तू रास्ते में मुझे गाली देता था — मैंने सुना था।
झू बाजिए बोला — भाई, मुझे पता था तुम जरूर किसी रूप में पीछे चले आओगे।
वुकोंग ने आदेश दिया — बड़े डंडे लाओ! पहले बीस मारो पिंडलियों पर, फिर बीस पीठ पर, फिर मेरा लोहदंड से विदाई का उपहार।
झू बाजिए हाथ जोड़ने लगा — भाई, गुरु के नाम पर माफ कर दो।
वुकोंग ने कहा — गुरु तो दयालु बड़े हैं।
झू बाजिए बोला — तो बोधिसत्त्व के नाम पर माफ कर दो।
गुआनयिन का नाम सुनकर वुकोंग का मन थोड़ा पिघला। वह बोला — ठीक है, सच बता। तांग सान्ज़ांग कहाँ मुसीबत में हैं?
झू बाजिए ने पूरी कहानी सुनाई — काले जंगल में गुरु का अपहरण, पीत-वस्त्र राक्षस, बाओसियांग राज्य की राजकुमारी जिसने एक चिट्ठी लिखी गुरु को घर भेजने के लिए। राक्षस का राजा के रूप में प्रकट होना। शा वुजिंग का बंदी होना। श्वेत नाग-अश्व का रात को राक्षस से टकराना और घायल होना।
— उसी घोड़े ने मुझे भेजा तुम्हारे पास, झू बाजिए बोला। उसने कहा — भाई, एक दिन गुरु, सदा के लिए पिता। जाओ और उन्हें बचाओ।
वुकोंग ने कहा — जाते समय मैंने कहा था कि अगर कोई मुसीबत आए तो बताना कि तुम्हारे एक बड़े शिष्य हैं। तुमने क्यों नहीं बताया?
झू बाजिए ने सोचा — बुलाना चाहते हो तो उकसाओ। बोला — भाई, तुम्हारा नाम लिया था। राक्षस ने तो कसम खाई — अगर वह वानर आया तो उसकी खाल उतारूँगा, हड्डियाँ चबाऊँगा, दिल खाऊँगा। पतला सा वानर है — तेल में तल डालूँगा।
वुकोंग का क्रोध भड़क उठा। कान खींचे, पैर पटके — कौन है जो मुझे ऐसे गालियाँ दे!
झू बाजिए बोला — वही पीत-वस्त्र राक्षस। मैं तुम्हें सुना रहा था।
वुकोंग खड़ा हो गया — चलते हैं। राक्षस ने मुझे गाली दी। मैं उसे छोड़ूँगा नहीं। काम होने के बाद लौट आऊँगा।
झू बाजिए बोला — बिल्कुल सही। काम खत्म करके आना या न आना, तुम्हारी मर्जी।
महासंत चट्टान से कूदे। गुफा में घुसे, जादुई वस्त्र उतारे, अपना असली चोगा पहना, बाघ की खाल की कमरबंद कसी और लोहदंड थामा। बंदरों का झुंड रोने लगा — दादा, हमें भी ले चलो।
वुकोंग बोला — मेरा काम यही है — तांग सान्ज़ांग का शिष्य बनना। घर की देखभाल करो, पेड़ लगाओ। जब मैं शास्त्र लेकर लौटूँगा, तब मिलकर आनंद करेंगे।
दोनों ने एक दूसरे का हाथ थामा और बादल पर सवार होकर पूर्व के महासागर के ऊपर से उड़ चले।
पश्चिमी तट के पास वुकोंग बोला — ठहरो। मुझे समुद्र में नहाना है।
झू बाजिए हैरान — इस जल्दी में नहाना?
वुकोंग बोला — गुरु बहुत सफाई पसंद हैं। मैं कई दिनों से राक्षसों के बीच रहा हूँ। उनकी गंध लगी है।
झू बाजिए समझा — यह तो सच्चा प्रेम है।
नहाने के बाद दोनों पश्चिम की ओर उड़े। वह सोने की मीनार दिखी।
झू बाजिए बोला — वही पीत-वस्त्र राक्षस का घर है। शा वुजिंग अभी भी वहीं है।
वुकोंग ने कहा — तुम आसमान में रुको। मैं नीचे देखता हूँ।
गुफा के दरवाजे पर दो बच्चे खेल रहे थे। वुकोंग ने उन्हें एक झटके में उठा लिया। बच्चे चिल्लाए। गुफा की रानी — वही बाओसियांग राज्य की राजकुमारी — दौड़ती आई।
वुकोंग बोला — मैं सुन वुकोंग हूँ। मेरा शिष्य शा वुजिंग यहाँ बंदी है। उसे छोड़ दो। बदले में यह दोनों बच्चे तुम्हें वापस।
राजकुमारी ने शा वुजिंग को खुद अपने हाथों से मुक्त किया।
शा वुजिंग ने कहा — राजकुमारी, यह मत करो। राक्षस आएगा तो तुम्हें तकलीफ होगी।
राजकुमारी बोली — तुम मेरे उपकारी हो। मेरी चिट्ठी ले जाकर तुमने मेरे पिता तक पहुँचाई। मुझे रास्ता मिला। अब तुम्हारे बड़े भाई सुन वुकोंग आए हैं, उनकी बात मानो।
शा वुजिंग ने "सुन वुकोंग" नाम सुना तो ऐसा लगा जैसे अंधेरे में रोशनी मिल गई। वह बाहर निकला और दंडवत प्रणाम किया।
वुकोंग ने हँसते हुए कहा — तुम यहाँ बैठे थे और गुरु पर संकट था। बताओ, यह ठीक है?
शा वुजिंग बोला — भाई, बीती बात भूलो। हम हारे हुए योद्धा हैं। बस अभी मुझे बचाओ।
अब वुकोंग ने योजना बनाई। झू बाजिए और शा वुजिंग दोनों बच्चों को लेकर बाओसियांग राज्य की राजधानी में जाएँ। उन्हें महल की सीढ़ियों से नीचे फेंक दें। राक्षस वापस आएगा। यहाँ मैं उससे निपटता हूँ।
इधर, झू बाजिए और शा वुजिंग बच्चों को लेकर महल में पहुँचे। दोनों बच्चे सफेद संगमरमर की सीढ़ियों से नीचे फेंके गए — वे चूर हो गए।
राजमहल में हड़कंप मच गया — आसमान से आदमी गिरे!
झू बाजिए ने ऊँची आवाज में पुकारा — ये पीत-वस्त्र राक्षस के बच्चे हैं। हम उन्हें पकड़ लाए।
राक्षस महल में पी रहा था। उसने सोचा — झू बाजिए तो समझ में आता है, पर शा वुजिंग तो मेरे यहाँ बँधा था। मेरी पत्नी ने उसे कैसे छोड़ा? और बच्चे? यह तो जाल लगता है। मैं पहले घर जाकर देखता हूँ।
इसी बीच महल में राज हो गया था कि यह असली राजा नहीं, राक्षस है। रात को उसने एक दासी को खा लिया था — बाकी दासियाँ भाग निकली थीं।
राजा ने असली बाघ को पिंजरे में बंद कर दिया था — वह तांग सान्ज़ांग था जिसे राक्षस ने बाघ बना दिया था।
राक्षस गुफा पहुँचा। वहाँ एक औरत रो रही थी — वह वुकोंग था, राजकुमारी का रूप धरे।
वुकोंग ने कहा — राक्षस ने बच्चे छीन लिए। तुम नहीं थे तो मैं क्या करती!
राक्षस भड़क गया — क्या यह सच में मेरे बच्चे थे? उसने उन्हें मार डाला?
वुकोंग ने कहा — हाँ, वही झू बाजिए ले गया।
राक्षस का क्रोध आसमान छू गया। फिर उसे याद आया — मेरी पत्नी को पीड़ा है। उसके दिल को सुकून देने के लिए मेरे पास एक रत्न है।
वह अपनी एक अमूल्य जड़ी — जीवन का सार — लेकर आया। यह उसका भीतरी रत्न था, वर्षों की तपस्या से बना।
वुकोंग ने उसे हाथ में लेकर एक उँगली से ठोका — झटके में निगल लिया।
राक्षस चीखा — वापस दो!
वुकोंग ने मुँह पोंछा और असली रूप दिखाया — कौन हूँ मैं, पहचान।
राक्षस थोड़ी देर घूरता रहा — तुम! तुम्हारी जगह यहाँ नहीं।
वुकोंग बोला — मैं तांग सान्ज़ांग का बड़ा शिष्य हूँ। तेरा पाँच सौ साल पुराना दादा।
राक्षस ने कहा — नहीं, झू बाजिए और शा वुजिंग की बात की, तुम्हारा नाम कभी नहीं लिया।
वुकोंग बोला — गुरु ने मुझे निकाला था। इसीलिए मैं साथ नहीं था। लेकिन गुरु पिता समान हैं। तूने उन्हें तकलीफ दी — मैं कैसे न आता? और तूने मुझे गालियाँ दीं।
राक्षस बोला — मैंने गाली नहीं दी।
वुकोंग — झू बाजिए ने बताया।
राक्षस — वह झूठा है। उसकी मत सुनो।
वुकोंग बोला — चलो, बात बंद। अब सिर सामने लाओ — मेरा लोहदंड चाय की जगह है।
राक्षस हँसा — तुम घर में आ गए। सौ छोटे राक्षस हैं यहाँ। तुम निकल नहीं पाओगे।
वुकोंग बोला — हजार भी होते तो एक-एक को गिनकर मारता।
राक्षस ने पूरी सेना बुलाई। तीन-चार परतों में द्वार बंद हो गए।
वुकोंग ने ललकारा — बदलो!
और उसके तीन सिर और छह हाथ हो गए। तीन लोहदंड एक साथ चले — जैसे भेड़ों में शेर घुस जाए। राक्षसों के सिर टूटे, लहू बहा।
अंत में बस बड़ा राक्षस बचा। उसने तलवार निकाली और वार किया।
वे दोनों आधे बादल आधे धूप में लड़ते रहे — पचास से अधिक बार तलवार और दंड टकराए।
वुकोंग का दंड आसमान काटता, राक्षस की तलवार ललकार देती। दोनों की गर्जना धरती हिलाती, पर विजय अभी किसी को न मिलती।
वुकोंग ने सोचा — यह मजबूत है, पर मैं इससे खेलता हूँ।
उसने एक कमजोर मुद्रा दिखाई। राक्षस ने नीचे वार किया। वुकोंग ने चालाकी से दंड घुमाया और राक्षस के सिर पर ऐसा मारा कि वह गायब हो गया।
वुकोंग हैरान — मरे तो लहू होता। गायब कैसे? जरूर यह स्वर्ग का प्राणी है।
वह सीधे दक्षिण स्वर्ग-द्वार तक पहुँचा। देवताओं ने रास्ता दिया। वहाँ चारों महाज्योतिषियों ने उसे रोका — महासंत, क्यों आए?
वुकोंग ने बताया — बाओसियांग राज्य में एक राक्षस ने राजकुमारी को छीन लिया, गुरु को तंग किया। युद्ध में वह गायब हो गया। जरूर वह स्वर्ग से भागा होगा। कोई देव लापता है?
जाँच हुई। सत्ताईस नक्षत्र देव थे — अट्ठाईसवाँ गायब था। वह था कुई-नक्षत्र देव — भेड़िये का तारा।
जेड सम्राट बोले — तेरह दिन से नहीं आया। स्वर्ग में एक दिन, धरती पर एक वर्ष। तो तेरह वर्ष हो गए।
अपने विभाग के देवों ने कुई देव को पुकारा। वह पहाड़ी नाले में छुपा था — पाँच सौ वर्ष पहले जब वुकोंग ने स्वर्ग में उत्पात मचाया था तब से वहीं था।
कुई देव ने सिर झुकाकर कहा — बाओसियांग की राजकुमारी असल में स्वर्ग की दासी थी। उसने मुझसे प्रेम किया और धरती पर जन्म ले लिया। मैं उसके पीछे राक्षस बनकर गया। तेरह वर्ष तक उसका पति बना।
जेड सम्राट ने आज्ञा दी — उसे परम वृद्ध देव के पास भेजो। वहाँ आग जलाएगा।
वुकोंग ने एक बड़ा प्रणाम किया और लौट आया।
वुकोंग ने राजकुमारी को ढूँढा। उसे सारी बात बताई।
तभी ऊपर से झू बाजिए और शा वुजिंग की आवाज आई — भाई, राक्षस बाकी हैं। हमारे लिए छोड़ो।
वुकोंग ने कहा — सब खत्म हो गए।
शा वुजिंग बोला — तो चलो राजकुमारी को महल पहुँचाते हैं। मेरी "भूमि संकोचन विद्या" से।
राजकुमारी के कानों में हवा सनसनाई। आँख झपकते-झपकते वह अपने महल में थी।
वे तीनों राजकुमारी को ले गए राजसभा में। राजा की आँखें भर आईं।
राजकुमारी ने सब कुछ बताया — गुरु के शिष्य सुन वुकोंग ने राक्षस का नाश किया।
राजा ने पूछा — वह राक्षस कौन था?
वुकोंग ने जवाब दिया — महाराज, वह स्वर्ग का कुई-नक्षत्र देव था। राजकुमारी स्वर्ग की दासी थी। यह पुराना नाता था। अब जेड सम्राट ने उसे वापस बुला लिया।
राजा ने कहा — अब मेरे गुरु को मुक्त करो।
पिंजरे से असली बाघ — तांग सान्ज़ांग — निकाला गया। झू बाजिए ने पानी लाया। वुकोंग ने मंत्र पढ़कर पानी फेंका।
बाघ का जादू टूटा। तांग सान्ज़ांग अपने असली रूप में आए। आँखें खुलीं, वुकोंग को देखा।
— वुकोंग! तुम कहाँ से आए?
शा वुजिंग ने पूरी कहानी सुनाई — वुकोंग को कैसे बुलाया, राक्षस का नाश, राजकुमारी की मुक्ति।
तांग सान्ज़ांग की आँखें भर आईं — शिष्य, मेरा उपकार! पश्चिम पहुँचने पर तुम्हारा नाम सबसे पहले होगा।
वुकोंग ने कहा — बस, वह मंत्र मत पढ़ना।
राजा ने भोजन का प्रबंध किया। शाकाहारी भोज हुआ। फिर विदाई।
राजा अपने दरबारियों के साथ बहुत दूर तक साथ आया।
राजा वापस लौटा अपने सिंहासन पर, संत चले आगे — पश्चिम की राह पर।