अध्याय १०: नाग-राजा ने आकाश-नियम तोड़ा — मंत्री वेई ने पत्र भेजा यमराज को
जेड सम्राट के आदेश की अवहेलना करने पर नाग-राजा का सिर कटता है, महाराज ताइज़ोंग भूत से परेशान होते हैं, और मंत्री वेई झेंग यमराज को पत्र भेजते हैं
चांगआन शहर से बाहर — जिंग नदी के किनारे।
एक मछुआरा था — झांग शाओ। एक लकड़हारा था — ली डिंग।
दोनों पक्के दोस्त। पढ़े-लिखे लेकिन बेरोज़गार।
एक दिन दोनों शहर से लकड़ी और मछली बेचकर शराब पीने बैठे।
झांग शाओ बोला: — यार, सोचो — नाम-दौलत के लिए लोग जान देते हैं। हम बेहतर हैं — पानी, पहाड़, आज़ादी।
ली डिंग बोला: — भाई, तुम्हारा पानी अच्छा है — लेकिन मेरा पहाड़ बेहतर।
दोनों ने एक-दूसरे को कविताएँ सुनाईं।
मछुआरे ने गाया:
"धुंध भरी लहरें — छोटी नाव,
एकांत में तकिया बनाकर झोपड़े में सोता हूँ।
ताज़ी मछली काटो, कछुआ उबालो,
केकड़ा पकाओ — बेहतर है कोई राजा से।"
लकड़हारे ने जवाब दिया:
"बादलों में देवदार से भरा पहाड़,
कोयल गाती है — सुरीली।
गर्मी में नई बाँस काटो,
सर्दी में सूखी लकड़ी जमाओ।"
दोनों खूब हँसे। बहस की।
रास्ते के मोड़ पर जुदा हुए।
झांग शाओ ने कहा: — रास्ते में बाघ से बचना।
ली डिंग को गुस्सा आया: — तुम तो श्राप दे रहे हो! अगर मुझे बाघ मिला — तो तुम्हें तूफान मिलेगा।
— कभी नहीं।
— "आकाश में बादल अचानक आते हैं, इंसान का दुख भी।"
झांग शाओ ने बात टाली: — मेरे पास एक ज्योतिषी है। वो बताता है — कल कहाँ मछली मिलेगी।
— कौन?
— चांगआन के पश्चिमी बाज़ार में युआन शोचेंग। मैं रोज़ एक सुनहरी मछली देता हूँ, वो मुझे अगले दिन का भाग्य बताता है।
दोनों चले गए।
जिंग नदी का नाग-महल।
एक यक्ष ने सुना — सब बातें।
भागा। नाग-राजा को बताया: — एक ज्योतिषी है जो सब जानता है।
नाग-राजा क्रोधित हुए। तलवार उठाई।
पुत्रों ने रोका: — पहले खुद जाकर देखें।
नाग-राजा ने रूप बदला। एक सफेद वस्त्र-धारी विद्वान।
चांगआन गए।
रूप सुंदर, कद ऊँचा। क़दम मर्यादित, भाषा शिष्ट। शब्दों में कन्फ्यूशियस, व्यवहार में झोउ-नीति। सफेद वस्त्र, मुक्त मन।
बाज़ार पहुँचे।
एक भीड़ थी — युआन शोचेंग का दफ़्तर।
चारों दीवारें मोतियों से — रेशमी सजावट। सुगंधित बत्ती, साफ पानी। राजा वेई-यांग की तस्वीर, गुइगू का चित्र। दुआत, स्याही, पंख-कलम। "भूत-वर्तमान-भविष्य — दर्पण जैसे स्पष्ट।"
नाम था: युआन शोचेंग। वो युआन तियानग्रांग — सम्राट के राजज्योतिषी — के चाचा थे।
नाग-राजा आए। बैठे।
— मैं पूछने आया — कल मौसम क्या होगा?
युआन ने क्षण भर सोचा:
— कल बादल होंगे। दोपहर में बिजली। दोपहर में बारिश। शाम तक थमेगी। पानी — तीन फुट तीन इंच और अड़तालीस बूँद।
नाग-राजा ने मन में हँसकर कहा: — यह सब झूठ है। मैं बारिश का मालिक हूँ।
— ठीक है। अगर सही हुआ — पचास सोने की मोहरें। गलत हुआ — तुम्हारी दुकान बंद।
युआन ने स्वीकार किया।
नाग-राजा वापस गया।
उसी रात — जेड सम्राट का आदेश आया:
जिंग नदी के नाग-राजा को आदेश: कल चांगआन में बारिश करो। समय — दिन का पहला भाग: बादल, दूसरा भाग: बिजली, तीसरा भाग: वर्षा, चौथा भाग: समाप्त। पानी: तीन फुट तीन इंच — अड़तालीस बूँद।
वही समय, वही पानी — जो युआन ने कहा था।
नाग-राजा घबराया।
उसके सलाहकार ने कहा: — महाराज, समय में थोड़ा बदलाव कर दें। पानी थोड़ा कम करें। तब ज्योतिषी गलत साबित होगा।
नाग-राजा ने यही किया।
अगले दिन — एक घंटे की देरी, तीन इंच और आठ बूँद कम।
युआन शोचेंग की दुकान पर नाग-राजा वापस।
तोड़-फोड़ करने लगा।
युआन ने आँख भी नहीं झपकाई।
— मुझे पता है — तुम नाग-राजा हो। तुमने जेड सम्राट का आदेश तोड़ा। समय बदला, पानी घटाया।
— तुम्हें मौत की सज़ा होगी।
नाग-राजा थर्रा गया।
— मुझे बचाओ!
— मैं नहीं बचा सकता। लेकिन एक रास्ता है।
— क्या?
— महाराज ताइज़ोंग के यहाँ जाओ। उनके मंत्री — वेई झेंग — तुम्हें मारेंगे। अगर उनसे दया माँगो तो शायद बचो।
नाग-राजा रोते हुए गया।
रात को — महाराज ताइज़ोंग सपने में थे।
एक हाथ में कटा हुआ सिर लिए आदमी आया। रोया।
— मैं जिंग नदी का नाग हूँ। कल मुझे वेई झेंग के हाथों मरना है। आप ही मेरी एकमात्र उम्मीद हैं।
महाराज ताइज़ोंग ने वादा किया: — मैं बचाऊंगा।
सुबह उठे। दरबार में वेई झेंग को नहीं बुलाया। पास ही रखा।
शतरंज खेलने लगे।
दोपहर के आसपास — वेई झेंग सोने लगे।
महाराज ने हँसते हुए सोने दिया।
थोड़ी देर बाद — बाहर शोर।
सेनापति चिन शुबाओ और ज़ू माओगोंग एक खून से लथपथ सिर लेकर आए।
— यह बादलों से गिरा — शहर के बीच।
महाराज ने वेई झेंग से पूछा: — यह क्या है?
वेई झेंग ने प्रणाम किया: — यह मैंने सपने में काटा।
— सोते हुए?
— हाँ। सोते समय आत्मा ने काम किया। नाग-राजा अपने वध-स्थल पर था। मैंने कहा — तुमने आकाश-नियम तोड़ा। मैंने तलवार उठाई — और सिर गिरा।
महाराज उदास हुए: — मैंने वादा किया था।
रात को महाराज सो नहीं पाए।
नाग-राजा का भूत आया।
— आपने धोखा दिया! बचाने का वादा किया था!
महाराज डर गए।
अगले दिन से — रात को महल में आवाज़ें आने लगीं। ईंटें उड़तीं।
महाराज बीमार पड़ गए।
सेनापति चिन शुबाओ और हु जिंगडे ने कहा: — हम रात पहरा देंगे।
दोनों ने रात भर पहरा दिया — डरावने कवच में।
महाराज सो सके।
लेकिन — दोनों वीर सेनापति थक जाते। महाराज को दुख हुआ।
दरबारी चित्रकारों ने दोनों के चित्र बनाए — दरवाज़े पर लगाए।
आगे से — सब शांत।
लेकिन — पिछले दरवाज़े से आवाज़ें। और भी डरावनी।
मंत्री वेई झेंग ने कहा: — मेरे पास एक पत्र है। मेरा पुराना मित्र क्वेई — अब यमराज के दरबार में है। उसे यह पत्र पहुँचाइए।
महाराज ने पत्र लिया।
और — महाराज की आत्मा धीरे-धीरे उठी — यमराज के दरबार की ओर।
नाग-राजा ने आकाश की आज्ञा तोड़ी, वेई झेंग ने सपने में तलवार चलाई। महाराज का वादा टूटा — रात काली हुई, अब यमराज के दरबार में जाने की बारी।
अगले अध्याय में — महाराज ताइज़ोंग यमराज के दरबार में क्या देखेंगे? और क्या वो वापस लौट पाएंगे?